- मलेरिया फैलाने वाले मच्छर - यह मच्छर उबलते साफ पानी में अंडे देते हैं। मच्छर के पंखों पर सफेद धब्बे होते हैं और यह दीवार से 45 डिग्री के कोण पर बैठता है। यह मच्छर रात या सुबह के समय काटते हैं और एक बार काटने के बाद मत जाना पूरी तरह से दीवारों पर 3 दिनों तक टिका रहता है। इसलिए मच्छर को नियंत्रित करने के लिए घर पर नियमित रूप से छिड़काव किया जाता है।
- डेंगू और चिकनगुनिया - यह आरोप एडीज मच्छर प्रजाति के कारण होता है। महाराष्ट्र में इस बीमारी तीन प्रजातियों से यह बीमारी सकती हैं। यह रोग एडिज एजिप्टी, एडिज एलबॉपिक्टस और एडिट विटेटस द्वारा फैलता है। यह मच्छर लटकी हुई वस्तुओं, पर्दे, तारों के साथ - साथ अंधेरी और ठंडी जगहों पर भी रहते है। इसलिए इन रोगों में मुख्य रूप से इन मच्छरों को करने के लिए धुएं का छिड़काव किया जाता है। यह मच्छर अपने अंडे उबाल कर रखे हुए साफ पानी में देता है।
- एलिफेंटियासिस - एलिफेंटियासिस क्यूलेक्स मच्छर की प्रजाति से फैलता है। एलिफेंटियासिस क्यूलेक्स क्विंसिफीसीएटस जीनस के कारण होता है। यह मच्छर गंदे और प्रदूषित पानी में पनपते हैं। गटर, नालियों, सेप्टिक टैंक में अंडे देना। इस रोग में नैल्यों की निकासी, सेप्टिक टैंक पर जाल, वेंट पाइप पर जाल आदि लगाने के उपाय किए जाते है।

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