मुंबई। बॉलीवुड के अनुभवी सिनेमैटोग्राफर और जाने-माने चित्रकार अशोक सरोज एक बार फिर अपनी बहुआयामी कला को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कला-इवेंट के दौरान उन्होंने अपनी एक विशेष पेंटिंग प्रदर्शित की, जिसे दर्शकों और कला समीक्षकों से जबरदस्त प्रशंसा मिली। इस पेंटिंग के माध्यम से चित्रकार अशोक सरोज ने जीवन, संघर्ष, ज्ञान और राष्ट्रप्रेम जैसे गहरे विषयों को एक ही कैनवास पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
कला के कैनवास पर संघर्ष, ज्ञान और राष्ट्रप्रेम: चित्रकार अशोक सरोज की अनोखी प्रस्तुति

मीडिया हिंदुस्तान से बातचीत में चित्रकार अशोक सरोज ने बताया कि इस पेंटिंग का मूल भाव जीवन में नए और अनोखे कार्य करने वाले व्यक्ति की मानसिक दृढ़ता को दर्शाना है। उन्होंने हाथी और कुत्तों के प्रतीक के माध्यम से यह संदेश दिया कि जब कोई व्यक्ति कुछ अलग करने निकलता है, तो आलोचनाएं और बाधाएं स्वाभाविक रूप से सामने आती हैं। ठीक उसी तरह जैसे रास्ते से गुजरते हाथी पर कुत्ते भौंकते हैं, लेकिन हाथी अपनी मस्ती में आगे बढ़ता रहता है। वह जानता है कि उसकी ताकत कहीं अधिक है, इसलिए वह छोटी-छोटी बातों में अपना समय और ऊर्जा नष्ट नहीं करता।
विद्या, ज्ञान और पराक्रम के बहु-आयामी प्रतीक

इस पेंटिंग की विशेषता इसके अनेक प्रतीकात्मक आयाम हैं। इसमें एक विद्यार्थी को पुस्तक को नमन करते हुए दिखाया गया है, जो यह दर्शाता है कि विद्या जीवन का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली उपहार है।
इसी कैनवास पर महात्मा बुद्ध की छवि ज्ञान, शांति और एकाग्रता का प्रतीक बनकर उभरती है। वहीं, एक राजा का घोड़े पर सवार होकर दुर्ग पर चढ़ना पराक्रम, साहस और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। चित्रकार अशोक सरोज ने इन सभी प्रतीकों को एक ही पेंटिंग में संतुलित ढंग से पिरोया है।
देशप्रेम का सशक्त संदेश
पेंटिंग में भारत के तिरंगे का समावेश कर चित्रकार अशोक सरोज ने भारत माता और देशप्रेम का भी सशक्त संकेत दिया है। यह तिरंगा न केवल राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, बल्कि कलाकार की जड़ों और भारतीय संस्कृति से गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है।
पुरस्कार और सम्मान

कला के क्षेत्र में चित्रकार अशोक सरोज की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। कुछ महीने पूर्व उन्हें प्रतिष्ठित Manikarnika Art Gallery द्वारा उत्कृष्ट पेंटिंग के लिए गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। इससे पहले भी वह देश-विदेश में आयोजित कई कला प्रदर्शनों में पुरस्कार और सम्मान प्राप्त कर चुके हैं, जो उनकी निरंतर साधना और रचनात्मकता का प्रमाण है।

कला और सिनेमा का सफल संगम
बॉलीवुड के सिनेमैटोग्राफर होने के साथ-साथ चित्रकला में सक्रिय चित्रकार अशोक सरोज ने यह सिद्ध कर दिया है कि सिनेमा और पेंटिंग दोनों माध्यमों में विचार और दृष्टि की गहराई समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। उनकी यह नई पेंटिंग न केवल एक दृश्य कृति है, बल्कि जीवन को समझने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी देती है।







